Home टेक ISRO ने लॉन्च किया अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह GSAT-7R,...

ISRO ने लॉन्च किया अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह GSAT-7R, नौसेना को मिलेगी नई ताकत

0
ISRO GSAT-7R launch
ISRO GSAT-7R launch

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सोमवार को देश की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए अपने सबसे भारी संचार उपग्रह GSAT-7R (CMS-03) को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किए गए इस मिशन को भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह लॉन्च ISRO के सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 के माध्यम से किया गया, जिसने उपग्रह को सटीक रूप से उसकी कक्षा में स्थापित किया।

GSAT-7R भारतीय नौसेना के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया सैन्य ग्रेड का संचार उपग्रह है, जो समुद्री निगरानी, संचार सुरक्षा और सामरिक समन्वय में अहम भूमिका निभाएगा। यह उपग्रह पुराने GSAT-7 (Rukmini) उपग्रह की जगह लेगा, जो 2013 में लॉन्च किया गया था। नए सैटेलाइट में आधुनिक ट्रांसपोंडर, हाई बैंडविड्थ डेटा ट्रांसफर क्षमता और वास्तविक समय में नेटवर्क कनेक्टिविटी जैसी उन्नत तकनीकें दी गई हैं।

इस अत्याधुनिक उपग्रह की मदद से नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र में बेहतर संचार नेटवर्क, मिशन नियंत्रण और जहाजों के बीच एन्क्रिप्टेड डेटा ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, GSAT-7R की तैनाती से भारत की समुद्री सीमाएं और निगरानी प्रणाली और भी सशक्त हो जाएंगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देना संभव होगा।

LVM3 रॉकेट, जिसे पहले GSLV Mk-III नाम से जाना जाता था, इस बार भी अपनी विश्वसनीयता और ताकत साबित करने में सफल रहा। यह वही रॉकेट है जिसका उपयोग ISRO ने चंद्रयान-3 मिशन में किया था। लगभग 6 टन वजनी GSAT-7R उपग्रह का यह प्रक्षेपण LVM3 की उन्नत वेरिएंट प्रणाली द्वारा किया गया, जो भारी पेलोड को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में पहुंचाने में सक्षम है।

ISRO के अध्यक्ष श्री एस. सोमनाथ ने इस ऐतिहासिक सफलता पर कहा कि GSAT-7R मिशन न केवल नौसेना की शक्ति को बढ़ाएगा, बल्कि देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्षेपण से भारत ने रक्षा संचार क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

सूत्रों के मुताबिक, GSAT-7R में Ka-बैंड और UHF फ्रीक्वेंसी बैंड दोनों पर कार्य करने की क्षमता है, जिससे यह अत्यधिक विश्वसनीय और सुरक्षित संचार प्रदान करता है। इसके जरिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत, पनडुब्बियां और एयरबोर्न प्लेटफॉर्म एक ही नेटवर्क पर जुड़े रहेंगे। इससे रियल-टाइम निगरानी, टार्गेट ट्रैकिंग और मिशन सपोर्ट क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

इसरो के इंजीनियरों ने बताया कि GSAT-7R को आने वाले वर्षों में देश के अन्य रक्षा संचार कार्यक्रमों के साथ एकीकृत किया जाएगा, ताकि तीनों सेनाओं को एक साझा स्पेस-आधारित नेटवर्क प्लेटफॉर्म मिल सके। यह मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” विजन के अनुरूप है, जिसके तहत भारत अपनी रक्षा तकनीकों को स्वदेशी स्तर पर विकसित कर रहा है।

भारतीय वैज्ञानिक समुदाय और रक्षा विश्लेषक मानते हैं कि इस मिशन के साथ भारत ने न केवल अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में बल्कि डिजिटल और सैटेलाइट संचार क्षमताओं में भी एक नया अध्याय खोला है। GSAT-7R के संचालन से भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी स्थिति और भी मजबूत करेगा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेगा।

इसरो की यह उपलब्धि न केवल विज्ञान जगत के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि यह भारत की रक्षा सुरक्षा और संचार तकनीक के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गई है। GSAT-7R ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब न केवल वैश्विक स्तर पर स्पेस पावर है बल्कि अपनी सैन्य संचार प्रणाली में भी पूरी तरह स्वावलंबी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version