बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में 6 नवंबर को राज्यभर में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। चुनाव आयोग के अनुसार, 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर 65.08% मतदान दर्ज किया गया, जो अब तक का सबसे अधिक प्रतिशत है।
यह 1998 के 64.6% रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए पिछले 75 वर्षों का नया इतिहास बन गया है।
2020 विधानसभा चुनाव में राज्य का औसत मतदान 57.29% और 2024 लोकसभा चुनाव में 56.28% था। इस बार क्रमशः 7.79% और 8.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई — जो जनता की गहरी भागीदारी का संकेत है।
📊 जिलेवार मतदान प्रतिशत: मुजफ्फरपुर सबसे आगे
पहले चरण में सबसे ज्यादा मतदान मुजफ्फरपुर (71.81%) में हुआ, जबकि पटना (59.02%) सबसे पीछे रहा।
अन्य जिलों में प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- समस्तीपुर: 71.74%
- मधेपुरा: 69.59%
- सहरसा: 69.38%
- बेगूसराय: 69.87%
- वैशाली: 68.50%
- खगड़िया: 67.90%
- गोपालगंज: 66.64%
- लखीसराय: 64.98%
कुल 3.75 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 2.44 करोड़ ने वोट डाला। 1,314 उम्मीदवारों की किस्मत अब ईवीएम में बंद है। आयोग ने बताया कि किसी भी बूथ पर दोबारा मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी, जो शांतिपूर्ण चुनाव का प्रमाण है।
🏛️ गठबंधनों के दावे और प्रतिदावे
🔵 एनडीए का आत्मविश्वास
एनडीए (भाजपा, जदयू, हम) ने इस रिकॉर्ड मतदान को विकास और सुशासन की स्वीकृति बताया। भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व पर जनता के भरोसे का परिणाम है।”
🔴 महागठबंधन का बदलाव का दावा
विपक्षी महागठबंधन (राजद, कांग्रेस, वामदल) ने इसे सरकार विरोधी वोटिंग बताया। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “यह मतदान सत्ता परिवर्तन का संकेत है। जनता बदलाव चाहती है।”
कांग्रेस के पवन खेड़ा ने दावा किया कि महागठबंधन को “स्पष्ट बहुमत” मिलेगा।
📌 प्रमुख चुनावी मुद्दे
👩🎓 रोजगार और बेरोजगारी
युवाओं के लिए रोजगार सृजन सबसे बड़ा मुद्दा रहा। पहली बार मतदान करने वाले युवाओं ने नौकरी और शिक्षा को प्राथमिकता दी।
⚙️ विकास बनाम जाति समीकरण
सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे बुनियादी विकास मुद्दों के साथ-साथ जातिगत समीकरण (यादव, कुर्मी, एससी, ईबीसी) भी निर्णायक रहे।
👩🦰 महिला मतदाताओं की भूमिका
महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर भी वोटिंग प्रभावित हुई। महिला मतदाताओं की भागीदारी 50% से अधिक रही, जो परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकती है।
🎯 प्रमुख उम्मीदवार और रणनीतिक सीटें
पहले चरण में कई दिग्गज मैदान में हैं:
- तेजस्वी यादव (राघोपुर)
- तेज प्रताप यादव (महुआ)
- सम्राट चौधरी (उपमुख्यमंत्री)
- विजय कुमार सिन्हा (विधानसभा स्पीकर)
2020 में इन 121 सीटों पर महागठबंधन ने 61 और एनडीए ने 59 सीटें जीती थीं। इस बार भी महुआ, राघोपुर, पटना साहिब, बेगूसराय, गया जैसी सीटें निर्णायक मानी जा रही हैं।
🗣️ प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का प्रभाव
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने इस बार कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है। उन्होंने कहा, “यह मतदान बिहार में परिवर्तन का संकेत है।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जन सुराज कुछ सीटों पर किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है।
📈 विश्लेषण: किसे होगा फायदा?
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में जब भी मतदान प्रतिशत 5% से ज्यादा बढ़ता है, सत्ता परिवर्तन की संभावना बढ़ जाती है।
हालांकि, कुछ विश्लेषक इसे “युवा और महिला मतदाताओं की नई राजनीतिक चेतना” से जोड़ रहे हैं। अंतिम फैसला मतगणना के दिन ही तय होगा।
🗓️ आगे की राह: दूसरा चरण और मतगणना
- दूसरा चरण: 11 नवंबर 2025
- सीटें: 122
- मतगणना: 14 नवंबर 2025
- एग्जिट पोल: 11 नवंबर शाम
दूसरे चरण में पटना, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, गया, जहानाबाद और औरंगाबाद जैसे अहम जिले शामिल हैं।
🔍 निष्कर्ष
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण इतिहास रच चुका है। शांतिपूर्ण माहौल, अभूतपूर्व मतदान और ऊर्जावान जनता ने यह दिखा दिया है कि बिहार की राजनीति में नया अध्याय शुरू हो चुका है।
अब सबकी निगाहें 14 नवंबर पर हैं — जब यह तय होगा कि यह उत्साह एनडीए की सत्ता बरकरार रखेगा या महागठबंधन के लिए बदलाव का संदेश बनेगा।



