आंध्र प्रदेश के मंदिर में भगदड़: श्रद्धा के बीच मौत का सन्नाटा
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में शनिवार तड़के एक दर्दनाक हादसा हुआ।
कासिबुग्गा कस्बे के श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में एकादशी के मौके पर दर्शन के लिए पहुंचे हज़ारों श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ मच गई।
कुछ ही मिनटों में पूरा माहौल हाहाकार में बदल गया। 9 लोगों की मौत हो गई और 16 से ज्यादा लोग घायल हुए।
📍 कैसे हुआ हादसा?
मंदिर की क्षमता करीब 2,000 लोगों की थी, लेकिन रात करीब 2:15 बजे तक 25,000 से अधिक भक्त दर्शन के लिए इकट्ठे हो चुके थे।
भीड़ बढ़ती गई और फिर अचानक लोहे की रेलिंग टूट गई, जिससे कई लोग नीचे गिर पड़े।
किसी को संभलने का मौका नहीं मिला — लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे, चीखें गूंजने लगीं और भगदड़ में सब कुछ थम गया।
मरने वालों में 8 महिलाएं और 1 बच्चा शामिल था। कुछ की मौत मौके पर हुई, बाकी ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
⚠️ कहां हुई चूक?
जांच में कई लापरवाहियां सामने आई हैं —
- भीड़ नियंत्रण का अभाव: इतनी भीड़ के बावजूद कोई ठोस प्रबंधन नहीं था।
- सुरक्षा खामियां: रेलिंग का टूटना बताता है कि बुनियादी ढांचा कमजोर था।
- एक ही प्रवेश-निकास मार्ग: इससे अफरातफरी बढ़ी।
- पुलिस को सूचना नहीं दी गई: कार्यक्रम का कोई आधिकारिक परमिशन नहीं लिया गया था।
मंदिर के 94 वर्षीय पुजारी ने कहा —
“इतने लोग एक साथ आ गए, हम कुछ कर ही नहीं पाए।”
यह बयान घटना की गंभीरता और तैयारी की कमी दोनों को उजागर करता है।
सरकार और प्रशासन की कार्रवाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शोक जताया और मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख, जबकि घायलों को ₹50,000 की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसे राज्य की “बहुत बड़ी त्रासदी” बताते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए।
केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू ने घटनास्थल का दौरा किया और पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
वहीं विपक्ष ने सरकार पर हमला करते हुए कहा —
“यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगी की अनदेखी है।”
लोगों ने क्या कहा?
एक महिला श्रद्धालु ने रोते हुए बताया —
“हम तो बस भगवान के दर्शन करने आए थे, पर वहां तो मौत का साया था। रेलिंग टूटी और सब गिर पड़े।”
एक स्थानीय युवक ने कहा —
“मंदिर में कोई व्यवस्था नहीं थी, बस भीड़ बढ़ती गई और सब कुछ बेकाबू हो गया।”
इन बयानों से साफ है कि हादसे के वक्त हालात कितने भयावह थे।
तथ्य और आंकड़े
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| घटना की तारीख | 1 नवंबर 2025 |
| स्थान | श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, कासिबुग्गा (श्रीकाकुलम), आंध्र प्रदेश |
| मृतक | 9 (8 महिलाएं, 1 बच्चा) |
| घायल | 16+ |
| मुख्य कारण | रेलिंग टूटना, भीड़ प्रबंधन की कमी |
| मुआवज़ा | ₹2 लाख (मृतक), ₹50,000 (घायल) |
| जांच आदेश | मुख्यमंत्री द्वारा उच्चस्तरीय समिति गठित |
पश्चिम बंगाल में भी ऐसे हादसे हो चुके हैं
यह कोई पहली घटना नहीं है। पश्चिम बंगाल में भी ऐसे हादसे पहले हो चुके हैं —
- 2019, लोकनाथ मंदिर: बाबा लोकनाथ के जन्मदिवस पर भगदड़ में 5 लोगों की मौत।
- 2017, गंगासागर मेला: तीर्थयात्रा के दौरान अफरातफरी में 6 श्रद्धालु कुचले गए।
इन घटनाओं के बाद भीड़ प्रबंधन को लेकर दावे हुए, लेकिन असलियत आज भी वहीं है — “तैयारी बाद में, हादसा पहले।”
निष्कर्ष: आस्था के साथ सुरक्षा भी जरूरी
श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है —
जब लाखों लोग एक साथ श्रद्धा में डूबे होते हैं, तब एक छोटी सी चूक बड़ी तबाही बन सकती है।
जरूरत है कि हर राज्य में भीड़ नियंत्रण के लिए सख्त नियम, आपात निकासी मार्ग (Emergency Exit), और आयोजकों की जवाबदेही तय की जाए।
क्योंकि —
“भगवान के दर्शन से पहले, इंसान की जान की सुरक्षा सबसे जरूरी है।”