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इसरो CMS-03 सैटेलाइट: 36000 किमी की ऊंचाई पर भारतीय नौसेना का शक्तिशाली संचार उपग्रह फाइनल ऑर्बिट में

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इसरो CMS-03 सैटेलाइट
इसरो CMS-03 सैटेलाइट

इसरो ने रचा इतिहास, CMS-03 मिशन पूरा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है. भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक इसरो CMS-03 सैटेलाइट सफलतापूर्वक अपनी अंतिम कक्षा में पहुंच गया है. यह उपग्रह पृथ्वी की सतह से 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित हो चुका है. कई सटीक ऑर्बिट-रेजिंग मैन्यूवर के बाद CMS-03 अब अपना मिशन शुरू करने के लिए तैयार है.

भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03

इसरो ने 2 नवंबर 2025 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसरो CMS-03 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था. लगभग 4,410 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह भारतीय मिट्टी से जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में भेजा गया अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है. देश के सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3-M5 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) ने इस विशाल उपग्रह को अंतरिक्ष में पहुंचाया.

नौसेना के लिए गेमचेंजर है CMS-03

जीसैट-7आर के नाम से भी जाना जाने वाला इसरो CMS-03 सैटेलाइट खासतौर पर भारतीय नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है. यह उपग्रह हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापक दूरसंचार कवरेज देगा. CMS-03 में लगे उन्नत ट्रांसपोंडर सी, कु और का बैंड पर आवाज, डेटा और वीडियो संचार को सपोर्ट करते हैं.

CMS-03 की प्रमुख विशेषताएं

  • मल्टी-बैंड संचार: विभिन्न रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड पर एकसाथ काम करने की क्षमता
  • सुरक्षित कनेक्टिविटी: नौसेना के युद्धपोतों, पनडुब्बियों, विमानों और तटीय केंद्रों के बीच एन्क्रिप्टेड संचार
  • रियल-टाइम डेटा: समुद्री संचालन के लिए तत्काल सूचना और वीडियो ट्रांसमिशन
  • विस्तृत कवरेज: पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में निर्बाध सेवा
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36000 किमी की ऊंचाई का महत्व

इसरो CMS-03 सैटेलाइट जिस 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है, वह जियोस्टेशनरी ऑर्बिट कहलाता है. इस कक्षा में उपग्रह पृथ्वी के घूर्णन के साथ-साथ घूमता है और हर 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करता है. जमीन से देखने पर यह आकाश में एक ही स्थान पर स्थिर दिखता है, जिससे लगातार संचार बना रहता है.

आत्मनिर्भर भारत की उड़ान

CMS-03 मिशन की सफलता आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करती है. पहले इसरो को भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए विदेशी एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता था. अब LVM3 रॉकेट की बढ़ी हुई क्षमता से भारत अपने सबसे भारी उपग्रहों को भी खुद लॉन्च कर सकता है. इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत का चमकता उदाहरण’ बताया.

समुद्री सुरक्षा में मजबूती

इसरो CMS-03 सैटेलाइट भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और सामरिक क्षमता को कई गुना बढ़ाएगा. जहां चीन जैसे देश हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं, वहीं यह उपग्रह भारत को रियल-टाइम मॉनिटरिंग और कमांड की ताकत देगा. दुश्मन के युद्धपोतों की निगरानी, समुद्री डाकुओं पर नजर और संयुक्त अभियानों में CMS-03 अहम भूमिका निभाएगा.

इसरो की लगातार उपलब्धियां

CMS-03 के सफल प्रक्षेपण से इसरो ने साबित किया है कि भारत अंतरिक्ष तकनीक में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है. LVM3 रॉकेट ने पहले चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब उपग्रहों को भी सफलतापूर्वक लॉन्च किया है. केंद्रीय विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसरो की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि संगठन एक के बाद एक सफलताओं के झंडे गाड़ रहा है.

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नागरिक सेवाओं में भी उपयोगी

इसरो CMS-03 सैटेलाइट केवल सैन्य उद्देश्यों तक सीमित नहीं है. यह टेली-शिक्षा, टेलीमेडिसिन और आपदा प्रबंधन जैसी नागरिक सेवाओं को भी मजबूत करेगा. दूरदराज के क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड पहुंच बेहतर होगी और डिजिटल इंडिया अभियान को गति मिलेगी.

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