Faridabad (Haryana): हरियाणा के फरीदाबाद में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां 19 वर्षीय कॉलेज छात्र ने कथित तौर पर एआई (Artificial Intelligence) से बनाए गए फर्जी वीडियो और तस्वीरों से ब्लैकमेल किए जाने के बाद आत्महत्या कर ली। पुलिस ने इस संबंध में दो अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
📍 क्या है पूरा मामला
यह घटना ओल्ड फरीदाबाद के बसेलवा कॉलोनी की है। मृतक की पहचान राहुल भारती (19) के रूप में हुई है, जो एक स्थानीय कॉलेज में बी.कॉम का छात्र था। पुलिस के मुताबिक, राहुल को कुछ अज्ञात लोगों ने एआई तकनीक से बनाए गए उसकी और उसकी बहनों के फर्जी अश्लील वीडियो और फोटो दिखाकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था। आरोपियों ने ₹20,000 की मांग की थी और धमकी दी थी कि यदि पैसा नहीं दिया गया तो वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर दिए जाएंगे।
⚠️ मानसिक दबाव में उठाया कदम
परिवार ने बताया कि राहुल पिछले कई दिनों से गुमसुम रहने लगा था। वह बहुत कम बोलता था और अपना अधिकतर समय कमरे में अकेले बिताता था। शनिवार शाम करीब 7 बजे उसने अपने कमरे में जहरीला पदार्थ (सल्फास की गोलियां) खा लिया। परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे बचाया नहीं जा सका।
👮♂️ पुलिस जांच और FIR
फरीदाबाद पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी यशपाल यादव ने बताया कि “मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज कर ली है और तकनीकी जांच शुरू कर दी है। आरोपी जल्द ही गिरफ्तार किए जाएंगे।”
पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है, जिसमें ‘साहिल’ नामक व्यक्ति के साथ चैटिंग और धमकियों के सबूत मिले हैं। चैट में आरोपी ने राहुल से पैसे मांगे थे और धमकी दी थी कि वीडियो वायरल कर देगा।
🧩 परिवार का आरोप और आगे की जांच
राहुल के पिता मनोज भारती ने बताया कि बेटे के मोबाइल में कुछ संदिग्ध बातचीत और फर्जी वीडियो के लिंक मिले हैं। उन्होंने शक जताया है कि आरोपी ‘साहिल’ के साथ उसका एक परिचित नीरज भारती भी इस मामले में शामिल हो सकता है। पुलिस अब दोनों की पहचान कर रही है और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
💻 एआई और डीपफेक तकनीक का बढ़ता खतरा
यह घटना समाज में तेजी से बढ़ते AI-generated deepfake videos और cyber blackmailing के खतरे की एक भयावह मिसाल है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए कड़े साइबर कानूनों और डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता है।






