आज यानी 4 नवंबर 2025 को, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बेहद व्यापक ऑनलाइन सट्टेबाजी एवं जुआ रैकेट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ₹ 35.80 करोड़ की राशि 300 से अधिक बैंक खातों में से जब्त की है — इस राशि को अवैध गतिविधियों से अर्जित “अपराध की आय” माना गया है।
यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (PMLA) की धारा के अंतर्गत की गई, जिसमें रैकेट के माध्यम से अवैध सट्टेबाजी एवं जुए से अर्जित रकम को छुपाने और कानूनी सफाई देने की रणनीति पाई गई है।
मामला और मुख्य आरोपी
- इस मामले की शुरुआत अहमदाबाद शहर पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दर्ज की गई FIR से हुई, जिसमें मुख्य आरोपी जितेन्द्र तेजाभाई हीरागर और उनके सहयोगियों को नामज़द किया गया है।
- जांच में पाया गया कि आरोपी लोगों ने भोले-भाले व्यक्तियों के नाम पर 448 से अधिक ‘म्यूल’ या डमी बैंक खाते खोले थे, जिनका प्रयोग अवैध गतिविधियों से अर्जित धन को बैंकिंग सिस्टम में छुपाने एवं स्थानांतरित करने के लिए किया गया था।
कार्यप्रणाली एवं ट्रांज़ैक्शन नेटवर्क
- इन डमी खातों को सुनियोजित तरीके से रैकेट के सदस्यों के हवाले कर दिया गया था, जिनका प्रयोग उच्च मात्रा में बैंकिंग लेनदेन (high-volume banking transactions) के लिए किया गया — विशेष रूप से सट्टेबाजी, जुआ एवं उससे जुड़े अन्य अपराधों में। DeshGujarat+1
- ED ने “मनी ट्रेल” यानी पैसे के लेन-देन की पड़ताल के तहत पहले लेयर में 995 से अधिक बैंक खाते का विश्लेषण किया, जिनमें ₹ 1,000 करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ था। DeshGujarat+1
जब्ती और आगे की कार्रवाई
- 29 अक्टूबर 2025 को ED ने प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (Provisional Attachment Order – PAO) जारी किया, जिसके तहत इन खातों में पायी गयी उपलब्ध शेष राशि ₹ 35.80 करोड़ को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया गया है।
- ED ने स्पष्ट किया है कि यह राशि “अपराध से अर्जित आय” है, जिसे ऑनलाइन सट्टेबाजी एवं जुए से प्राप्त किया गया माना जा रहा है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इन अवैध गतिविधियों से प्राप्त धन का उपयोग अन्य संपत्तियाँ हासिल करने या विदेश में भेजने के लिए किया गया था।
क्यों है यह कार्रवाई महत्वपूर्ण?
- यह कदम दिखाता है कि ED अब सिर्फ बड़े बैंक फ्रॉड्स तक सीमित नहीं है — बल्कि ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी एवं जुए से जुड़े लेन-देन पर भी बड़ी कार्रवाई कर रही है।
- इस तरह की कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि डमी बैंक खाते, म्यूल खातों का नेटवर्क और हाई-वॉल्यूम ट्रांज़ैक्शन कोई बचने योग्य रास्ता नहीं है।
- साथ ही, ऑनलाइन सट्टेबाजी एवं गेमिंग-प्लेटफॉर्म के जरिए धन शोधन को अंजाम देने वालों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की दिशा में यह एक मजबूत संकेत है।
आगे क्या होगा?
- ED आगे इस मामले की पड़ताल कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इन 300+ खातों के पीछे कितने व्यक्तियों की हिस्सेदारी है, और रैकेट ने किस प्रकार से धन को सिस्टम में घुमाया एवं स्थानांतरित किया।
- संभव है कि अन्य जुड़े दर्जनों बैंक खाते, बैक-एंड कम्पनियाँ, और संभवतः विदेश स्थित बैंकिंग/निर्मूलण नेटवर्क भी उजागर हों।
- इस कार्रवाई को देखते हुए, ऑनलाइन सट्टेबाजी एवं गेमिंग प्लेटफॉर्म पर निगरानी और कानून-व्यवस्था की सतर्कता और बढ़ने की संभावना है।
निष्कर्ष:
ED का यह एक्शन सिर्फ एक बैंक खाते या रकम की जब्ती नहीं है — यह ऑनलाइन सट्टेबाजी, धन शोधन और डमी बैंक खातों के माध्यम से चलने वाले अपराध-नेटवर्क के सामने एक बहुत ही दृढ़ चेतावनी है। ऐसे नेटवर्क अब सुरक्षित नहीं रह पाएँगे।
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